राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इंडिया न्यूटन ,आइन्सटीन और आर्किमिडीज़ के नियमों में संशोधन की जाँच कर रहीं .

On 22/05/2016    | Time: 12:08:12 PM | Source: Ajay Sharma Simla | Visits: 2332



राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इंडिया  न्यूटन ,आइन्सटीन और आर्किमिडीज़ के नियमों में संशोधन की जाँच कर रहीं .
शिमला-अजय शर्मा को सफलता पर 100 प्रतिशत विश्वास कि आधारभूत नियमों में भारत बनेगा विश्वगुरु। सहायक निदेशक (शिक्षा) अजय शर्मा की 34 वर्ष की मेहनत के बाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अमेरिका यूरोप से प्रकाशित शोधपत्रों में 2266 वर्ष पुराने आर्किमिडीज सिद्धान्त 331 वर्ष पुराने न्यूटन के नियमों और आइंस्टीन की E=mc2 ( mass energy equation या पदार्थ-ऊर्जा समीकरण) का संशोधन किया

अजय शर्मा दावे का आधार

मुझे विदेशों लगभग 95 बार इंटरनेशनल कान्फरैंसों में शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। मैंने अमेरिका, इग्लैंड, जर्मनी, रूस जैसे देशों की कान्फरैंसो में अपने रिसर्च पेपरज प्रस्तुत किये है। मेरे लैक्चर विडीयों रिकारड हुए है और वैज्ञानिकों ने कान्फरैंस प्रोसीडिग्ज में छापे है। यह भी अपने आप में मानयता है।

मेरे लगभग 55 रिसर्च पेपरज अमेरिका / यूरोप के वैज्ञानिकों की रिकोमैन्डसेसनज के बाद जरनलज में प्रकाषित हो चुके हैं। मेरी दो पुस्तकें Beyond Newton and Archimedes (2013) and Beyond Einstein and E=mc2 (2015) कैम्ब्रिज, इग्लैंड से प्रकाशित हो चुकी है। इन पुस्तकों को प्रकाशक विक्टर रिकैनस्काई ने अपने खर्च पर छापा है। इन में विस्तृत जानकारी है।

अमेरिका /यूरोप में मेरी कोई रिश्तेदारी नहीं है कि वैज्ञानिकों ने मेरा काम प्रकाषित किया है.... कारण है मेरिट सिर्फ मैरिट ।

जब हजारों सैंकड़ों साल पहले ये नियम बने थे, उस समय ऐक्पैरीमैंटल और मैथेमैटिकल आधार न के बराबर था। तब ये नियम सही थे। आज के संदर्भ में नियमों को अपडेट करना या उनमें संषोधन करना लाजिमी है। मैं एक बार फिर कहता हूं कि मैं नियमों को पूरी तरह गलत नहीं कह रहा हूं उनहें आगे बढ़ा रहा हूं। उन्हें पूर्ण या कम्पलीट बना रहा हूं। विज्ञान अधूरा था, विज्ञान अधूरा है, विज्ञान अधूरा रहेगा।

भाग II

* ज्ून 2015 में अजय शर्मा ने दोनों पुस्तकें केन्द्रीय साइंस एंड टैक्नोलॉजी मंत्री डा॰ हर्षवर्धन को मूल्यांकन हेतु दी। उनका रेस्पोंस पूरी तरह सकारात्मक था। इसके बाद जुलाई 2015 में विज्ञान और टैक्नोलॉजी विभाग के सैक्रेटरी प्रो॰ आशुतोष शर्मा ने दोनों पुस्तकों को राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इलाहाबाद को मूल्यांकन हेतु भेज दिया। बहुत-2 धनयवाद।

** अप्रैल 2016 में अकादमी के कार्यकारी सचिव ने पुष्टि की कि अजय की शोध के मूल्यांकन हेतु कमेटी का गठन किया जा चुका है और वैज्ञानिक कार्य कर रहे है। उन्होंने यह भी लिखा कि अजय शर्मा अपने सभी शोधपत्र और पूर्व में दी गई वैज्ञानिकों की टिप्पिणयां (कमैंटस) भी विज्ञान अकादमी को भेज दें।

अजय शर्मा का मानना है कि विज्ञान अनन्त है हम उसका कुछ भाग ही समझ पाएं है और बहुत कुछ समझना बाकी है। दुनिया को 7.29 अरब लोग इसे सही मानते हैं। ये नियम विश्व के 220 देशों में पढ़ाए जा रहे है। अजय शर्मा ने कहा, उनके शोधपत्रों में 7.29 अरब लोगों के लिए बहुत कुछ नया हे।

1985 में अजय शर्मा ने अपना टीचिंग कैरियर डी॰ ए॰ वी॰ कॉलेज चंडीगढ़ से लेक्चरर फ़िज़िक्स के रूप से किया था। शर्मा 34 वर्षों से विकट हालातों में न्यूटन, आइंस्टीन और आर्किमिडीज पर शोध कर रहे हैं। इस पर वे अपने पिता, पत्नी और अपनी जेब से लाखों रुपया खर्च कर चूके हैं। यह सारा कार्य देवभूमि हिमाचल में ही सम्पन्न हुआ है। 1987 से अजय शर्मा हिमाचल के शिक्षा विभाग में कार्यरत है। इस काम में अजय शर्मा के सरकार से पूरा सहयोग मिला है।

भाग III

सरकार से गुहार

शर्मा ने कहा मेरे शोधकार्य पर खुले और विडीयो रिकारडिड सेमिनार करवाए जाए। मैं वैज्ञानिकों के प्रश्नों के उत्तर लिखित रूप से सेमिनार में ही दूंगा। हर प्रश्न का उत्तर मेरे शोधपत्रों और पुस्तकों में है। फिर डिस्कशन को इंटरनेशनल लेवेल पर कोममेंट्स के लिए U-TUBE पर डाला जाएगा। सही और गलत का फैसला वहीं फैसला हो जाएगा.

* न्यूटन की गति का दूसरा नियम F=ma . यह नियम न्यूटन ने कभी नहीं दिया था।

न्यूटन ने प्रिंसिपिया के पृष्ठ 19-20 में अलग नियम दिया है। जिस नियम को हम न्यूटन की गति के दूसरे नियम (F=ma) के नाम से पढ़ाते हैं, वह स्विटरजरलैंड के वैज्ञानिक लियोन हार्ड यूलर ने दिया था। यूलर ने यह नियम न्यूटन की मृत्यु के 48 वर्ष बाद 1775 में दिया था। यूलर के शोधपत्र को मैथेमैटिकल सोसायटी आॅफ अमेरिका की वेबसाइट www.eulerarchive. maa. Org पर देखा जा सकता है। Paper E479 pp. 223 में F=ma साफ दिया गया है।

** न्यूटन की गति का तीसरा नियम आधा अधूरा

तीसरे नियम की परिभाषा : ‘क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।’

महत्वपूर्ण खामीः न्यूटन की पुस्तक ‘प्रिंसीपिया’(1687) के पृष्ठ न. 19-20 में, तीसरे नियम के अनुसार वस्तु की ***प्रकृति और संरचना पूरी तरह महत्वहीन और निरर्थक है।***

यह वस्तु की प्रकृति और संरचना की अनदेखी करता है। यदि रबड़ और ऊन या स्पंज की गेंद को समान क्रिया से दीवार पर पटकें तो प्रतिक्रिया बराबर होनी चाहिए। पर प्रतिक्रिया रबड की गेंद में ज्यादा होती है,

यहां न्यूटन का नियम सही नहीं है इसलिए इसे संशोधित किया गया है। नया नियम वस्तु की प्रकृति और संरचना की व्याख्या करता है।संसोधित नियम में एक नया घटक (समानुपात का चिन्ह) आ जाता है। यह वस्तु की प्रकृति और संरचना की व्याख्या करता है।

*** आर्किमिडीज का सिद्धांत***

यहाँ हम आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुप्रयोगो (applications) की व्याख्या सीधे कर रहे हैं। आर्किमिडीज का सिद्धान्त व्यावहारिक रुप से वस्तु के आयतन या वौल्यूम या घनत्व (density) हीका जिक्र करता है। इस सिद्धान्त की मुख्य खामी यह है कि यह ‘वस्तु के आकार’ या शेप आॅफ बाॅडी की अनदेखी करता है।यह वस्तु के आकार (गोल या टेढ़ी मेढी/ चपटी) की अनदेखी करता है।

रोजमर्रा के प्रयोगों में ‘वस्तु के आकार’ के प्रभाव को समायाजित करने के लिए सिद्धान्त का संषोधन किया गया है। संषोधन से सिद्धान्त पूर्ण या परफैक्ट हो जाता है।

मान लो एक कि ग्राम स्टील का गोला या एक ग्राम स्टील की टेढ़ी मेढ़ी पत्ती को पानी के ड्रम में गिराते हैं। सिद्धान्त के अनुसार दोनों वस्तुओं को ‘समान समय’ में ‘समान दूरियां’ तय करनी चाहिए। इसे प्रयोगो में गलत पाया गया है। इसलिए सिद्धान्त का संषोधन किया गया है ताकि वस्तु के आकार की व्याख्या हो सके।

***आइस्टीन के E=mc2 समीकरण डेरिवेसन की गंभीर खामी****

आइस्टीन ने E=mc2 , 27 सितम्बर 1905 को जर्मन शोधपत्रिका ‘’एनलडर फिजिक’’ के पृष्ठ 639-641 मे दी थी। एडिटर ने इसे बिना जांचे -परखे, बिना वैज्ञानिकों की राय के छाप दिया ।

मैथमेटिकल डेरीवेसन में खामी : आंइस्टीन ने पैरामीटरज के विषेष मान (वैल्युज) ली हैं। आंइस्टीन ने एक अरब(1 Billion) या अधिक पैरामीटरज मानों (वैल्यूज) को जानबूझ कर इग्नोर या अनदेखा किया है। आइस्टीन का काम अधूरा है। यहाँ पर अजय शर्मा ने नया समीकरण, dE=Admc2 दिया है जो व्यापक इक्वेशन है और आइस्टीन की E=mc2 इसकी विशेष अवस्था है।

इसके अलावा शर्मा का और भी कार्य है जिसकी व्याख्या यहा नहीं की जा सकती।