इफको द्वारा “इफको आई मंडी ऐप” की शुरुआत

On 15/07/2018    | Time: 17:58:19 PM | Source: Shivangi Srivastava | Visits: 43



इफको द्वारा “इफको आई मंडी ऐप” की शुरुआत
ग्रामीण डिजिटल क्रांति की ओर कदम बढ़ाते हुये

इफको आई मंडी भारत की सबसे बड़े ग्रामीण ई प्लेटफार्म बन सकती है, इससे 5.5 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा~

नई दिल्ली, 15 जुलाई 2018 : सहकारी क्षेत्र की विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक उत्पादक कंपनी इफको ने किसानों की सेवा के उद्देश्य से सोशल ई-कॉमर्स ऐप (इफको आई मंडी) तथा एक वेब पोर्टल शुरू करके डिजिटल क्षेत्र में एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। इफको की सभी ई-कॉमर्स और डिजिटल गतिविधियाँ इफको आई मंडी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेंगी।

आई मंडी, इफको की शत-प्रतिशत साझेदारी वाली सहयोगी कंपनी इफको ई बाज़ार लिमिटेड द्वारा सिंगापुर की प्रद्योगिकी कंपनी आई मंडी प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर किया गया एक नीतिगत निवेश है। कृषि उद्योग तथा मोबाइल/इंटरनेट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के अनुभवी और पेशेवर लोग इससे जुड़े हुये हैं। इस पहल का उद्देश्य देश के हर किसान तक डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ पहुंचाना तथा ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति लाना है।

इफको के प्रबंध निदेशक, डॉ. यू एस अवस्थी ने इस मौके पर कहा कि पूरे भारत में किसानों के बीच ऑनलाइन और डिजिटल लेन-देन के प्रयोग को प्रचारित प्रसारित करने के पश्चात अभियान के बाद ‘इफको आई मंडी ऐप’ की शुरुआत करते हुए हमें गर्व है। आई मंडी कृषि आदानों, उत्पादों, उपभोक्ता वस्तुओं (एफ़एमसीजी),इलेक्ट्रॉनिक्स, ऋण तथा बीमा आदि की खरीद के लिए वस्तुएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराती है। यह खेतिहर समुदायों की सभी जरूरतों को पूरा करेगी तथा 5.5 करोड़ किसान इससे लाभान्वित होंगे।

आई मंडी प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक, वी के अग्रवाल ने कहा कि इफको और आई मंडी को इस बात से आश्वस्त हैं कि इस भारतीय सहकारी डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से हरेक घर, हरेक गाँव में बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव लाने में मदद मिलेगी तथा इसकी डिजिटल समावेशी प्रौद्योगिकी से एक करोड़ लोग सशक्त होंगे।

इस परियोजना को व्यापक स्तर पर कार्यान्वित किया जाएगा। इफको के 55000 बिक्री केन्द्रों, 36000 सदस्य सहकारी समितियों, 30000 भंडार गृहों तथा 25 करोड़ ग्रामीण उपभोक्ताओं से जुड़कर आई मंडी ग्रामीण सोशल ई कॉमर्स क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। लगभग 16000 पिन कोड के जरिए भारत का लगभग एक तिहाई हिस्सा इससे जुड़ेगा। एंड्रॉयड और आईओएस फोन पर क्रमशः प्ले स्टोर और ऐप स्टोर के जरिए आई मंडी ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है। www.iffcoimandi.in के माध्यम से वेब से भी इससे जुड़ा जा सकता है। इसमें विभिन्न बिक्री केन्द्रों के माध्यम से लोगों की जरूरतें पूरा करने के अतिरिक्त किसानों को जोड़ने के लिए संवाद (चैट एवं कॉलिंग), मनोरंजन तथा सूचना/परामर्श आदि की सुविधा भी उपलब्ध है। इसकी सोशल और संवाद संबंधी सुविधा से विभिन्न क्षेत्रों के लोग एक ही प्लेटफार्म पर जुड़ सकेंगे। अपनी अपनी रुचि के मुताबिक लोग अलग-अलग फोरम चुन सकते हैं। वे विषय के विशेषज्ञों से बात कर सकते हैं तथा विभिन्न समस्याओं पर उनसे सलाह ले सकते हैं। यही नहीं वे एक दूसरे से अपनी कामयाबी भी साझा कर सकते हैं।

बिक्री केंद्र से किसान इस समय उर्वरक (रासायनिक,जल विलेय, कार्बनिक,जैविक आदि), कृषि रसायन तथा बीज सहित इफको के सभी उत्पाद रियायती मूल्य पर खरीद सकते हैं तथा बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के इन्हें घर बैठे मंगा सकते हैं। किसान अपना लेन-देन मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल अथवा कॉल सेंटर के जरिए टोल फ्री नंबर 1800 2000 344 पर कॉल करके, कर सकते हैं। वे चैट, ऑडियो और वीडियो कॉल तथा चित्र और वीडियो साझा करके अपने दोस्तों और परिवार के साथ संपर्क में रह सकते हैं। इसमें संचार की सुविधा एंड टु एंड इंक्रीप्टेड है तथा डाटा पूरी तरह निजी और सुरक्षित है।

प्रयोक्ता मनोरंजक वीडियो के साथ-साथ मौसम, मंडी मूल्य तथा दैनिक खबरों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त वे अपने पसंदीदा स्थानीय और राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन के कार्यक्रम भी सुन सकते हैं।

किसान निकट भविष्य में अपने उत्पाद अच्छी कीमतों पर ऑनलाइन बेच सकेंगे। आई मंडी के जरिए ऋण, बीमा जैसी अनेक वित्तीय सेवाओं की सुविधा भी मिलेंगी।

समय के साथ इस ऐप पर अनेक सामाजिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके जरिए ऑनलाइन शिक्षा और कौशल-विकास के साथ-साथ रोजगार पाने में भी मदद मिलेगी। इस ऐप के माध्यम से बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध करायी जाएंगी।

आई मंडी ऐप की यह खासियत है कि यह 2जी प्लस और 3जी प्लस दोनों ही प्रकार की तकनीक वाले स्मार्ट फोन पर काम करता है। हिन्दी और अंग्रेजी के अतिरिक्त यह भारत की 10 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसे ग्रामीण भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।