तीसरी बार भी पेश नहीं हुआ तो घोषित हो जाएगा भगोड़ा

On 07/04/2018    | Time: 09:41:07 AM | Source: Mathura News | Visits: 49



तीसरी बार भी पेश नहीं हुआ तो घोषित हो जाएगा भगोड़ा
दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट ने महिलाओं को अलग किया

राणा की पत्नी व बहिन की भी जमानत स्वीकार

राणा सहित निदेशकों आरसी शर्मा, अजय कुमार शर्मा, राजकुमार लूथरा, ब्रजमोहन सिंह व भानु प्रताप सिंह के खिलाफ होना है आदेश



मथुरा (विजय कुमार आर्य)। कल्पतरु ग्रुप के नाम से दर्जनों कंपनियों का संचालन करने वाला जय कृष्ण सिंह राणा इन दिनों कल्पतरु परिसर, चुरमुरा, थाना फरह जिला मथुरा से इन दिनों फरार है। मथुरा, आगरा, ग्वालियर सहित कई शहरों में उसके खिलाफ धोखाधड़ी कर जनता का पैसा हड़पने से संबंधित एक सैकड़ा से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन वह सबकी आंखों में धूल झांेक कर गायब है।



यहां तक कि वह आजकल मध्य दिल्ली की अपर जिला जज एवं सेशन कोर्ट में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा सेबी अधिनियम की धारा 24 व 27 में अनधिकृत रूप से निवेश योजनाओं में लोगों से पैसा उगाहने के मामले में दर्ज किए मुकदमे में भी वह लगातार अनुपस्थित चल रहा है। जिसके चलते कोर्ट ने उसके खिलाफ जमानती और फिर बाद में भी गायब रहने पर गैर जमानती वारंट जारी कर रखे हैं। लेकिन, वह अभी तक हाजिर नहीं हुआ है।



विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 14 मार्च व 3 अपै्रल को दो बार सुनवाई हो चुकी है। जिनमें न वह पेश हुआ और न ही उसका कोई प्रतिनिधि। जिसके कारण एडीजे श्रीमती पूनम चैधरी ने दोनों बार गैरजमानती वारण्ट जारी करने के आदेश पारित किए। वहीं इस केस में महिलाओं की संलिप्तता पर उनके जवाब वाजिब मानते हुए एक-एक कर चारों (राणा की पत्नी मिथिलेश सिंह, बहिन बीना सिंह, निदेशक सीमा शर्मा व कविता गौतम) की जमानत मंजूर कर ली गई है।



इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब बस, कल्पतरु एग्रो सहित प्रबंध निदेशक जयकृष्ण सिंह राणा, निदेशकगण आरसी शर्मा, आरके लूथरा, ब्रजमोहन सिंह, भानुप्रताप सिंह (कल्पबट रीयल एस्टेट के प्रबंध निदेशक) व अजय कुमार शर्मा को सजा सुनाई जानी है।



खास बात यह है कि 13 दिसंबर 1995 में पहली कंपनी स्थापित करने वाले इस ग्रुप की तमाम कंपनियों के विरुद्ध आदेश पारित किए जाते रहे, और वह नित्य नई स्कीमें लाकर नई-नई कंपनियां खोलता रहा। ढाई वर्ष के कमतर समय में धन दोगुना करने के लालच में गरीब जनता लुटती रही, अधिकारी जेबें भरते रहे और सरकारें आंखें मूंदे तमाशा देखती रहीं।



हजारों-लाखों के सपनों एवं जिन्दगी भर की कमाई को खुलेआम जश्न मनाकर ठिकाने लगाने वाला साल-दर-साल नई कंपनी खोलकर सभी को खुली चुनौती देता रहा।



ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि जब कल्पतरु एग्रो इण्डिया लिमिटेड के नाम से कंपनी खोलकर खेती की उपज का कई गुना भुगतान करने का वादा करने वाले जेकेएस राणा ने वर्ष 2003 में सेबी में पंजीकरण के लिए आवेदन किया, तो सेबी ने कंपनी द्वारा कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम के अंतर्गत धन जमा करने की कार्यवाही को गैरकानूनी बताते हुए 10 अप्रैल 2003 को कंपनी को भंग करने तथा लोगों का धन तुरंत वापस करने के आदेश दिए थे।



लेकिन, मजे की बात यह है कि कंपनी अपनी काम तब भी धड़ल्ले से करती रही जबकि सेबी ने इस आदेश की प्रति राज्य सरकार को भेजते हुए दूसरे पैरा में कंपनी द्वारा किए जा रहे फ्राॅड, चीटिंग, आपराधिक तरीके से विश्वासहनन एवं जनता के पैसे का दुरुपयोग करने का मामला बताते हुए सिविल एवं क्रिमिनल दर्ज करने को कहा था। सेबी ने कंपनी विभाग को इण्डियन कंपनीज एक्ट की धारा 433 के तहत कंपनी संचालन तुरंत बंद कराने को कहा था।



लेकिन मामला ढाक के तीन पात ही रहा। किस-किस ने क्या कार्रवाई की, वह सबके सामने है। राणा की एक कंपनी बंद होने से पूर्व उसी काम के लिए दो-तीन और नई कंपनियां खुलती रहीं और जनता उनमें पैसा जमा करती रही। वह सबको सब्ज़बाग दिखाता रहा।



हां, सेबी ने जरूर इस मामले को ढीला नहीं छोड़ा। और अब 15 वर्ष बाद यह प्रकरण अपने अंजाम तक पहंुचने ही वाला है। कानून के जानकारों का मानना है कि इसमें आरोपी राणा को उपस्थित होना पड़ेगा। अन्यथा उसे भगोड़ा घोषित कर कुर्की की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।