किसानों की आय के लिए दोगुना करने के लिए समेकित खेती की आवश्यकता - डॉ. जितेन्द्र चौहान

On 10/11/2017    | Time: 21:52:46 PM | Source: Mathura News | Visits: 127



किसानों की आय के लिए दोगुना करने के लिए समेकित खेती की आवश्यकता - डॉ. जितेन्द्र चौहान
दो दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी सम्पन्न

मखदूम (मथुरा) । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आइ.सी.ए.आर.) - केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथुरा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आइ.सी.ए.आर.) - केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केन्द्र अविकानगर, राजस्थान के सहयोग से आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अन्तिम दिन डॉ. जितेन्द्र कुमार चौहान सलाहकार, कृषि मत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि कृषक का आय दोगुना करने के लिए किसानों को केवल कृषि ही नहीं, पशु पालन, मछली पालन, मुर्गी पालन समेकित खेती करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बकरी के मांस, दूध की गुणवत्ता, चिकित्सीय गुण आम आदमी तक पहुंचाये जाने की आवश्यकता है।

देश में किये जा रहे शोधों तथा अन्य गतिविधियों को छात्रों, शोधार्थियों, वैज्ञानिकों, नीति निर्धारकों, व्यावसायियों, हित धारकों के मध्य विचार-विनिमय, अनुभवों तथा जानकारियों को सुव्यवस्थित रूप से आदान-प्रदान से अवगत कराया गया।

डॉ. के.के. सहारिया ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशाला में किये गये शोधों को किसानों तक पहुंचाये जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों ने लघु रोमंथी पशुओं की उत्पादकता तथा इन पशुओं पालकों की आय बढ़ाने के लिए वर्तमान में किये जा रहे शोधों और उनके प्रसार सम्बन्धित गतिविधियों पर चर्चा की गयी।

प्रधान वैज्ञानिक डॉ.ए.के.शिन्दे ने भेड़ प्रजनन (उत्पादन), प्रसंस्करण तथा विपणन की वर्तमान प्रवृत्तियों पर अपने विचार व्यक्त किये।

प्रधान वैज्ञानिक डॉ.रवीन्द्र कुमार ने रेवड़ों में बकरी पालने वालों की उत्पादकता बढ़ाने हेतु उनके पोषणिक परिवर्तन और उसके लिए सस्ती तकनीक पर चर्चा की। भेड़ और बकरी के स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं और उनके लिए उपलब्ध तरह-तरह के टीकों के बारे में इस क्षेत्र के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रधान वैज्ञानिक डॉ.डी.सिंह, प्रधान वैज्ञानिक डॉ.अशोक कुमार, प्रोफेसर डॉ.वाई.के.एम. रेड्डी ने अपने-अपने विचार प्रकट किये।

प्रधान वैज्ञानिक डॉ.एम.के.सिंह ने भारत में बकरी की उत्पादकता बढ़ा कर खाद्य सुरक्षा तथा जीविका में सुधार के लिए अनिवार्य उपायों पर चर्चा की। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.ए.के. दीक्षित ने भारत में बकरी के व्यावसायिक पालन की स्थिति एवं सम्भावनाओं पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।

इस क्षेत्र में कार्यरत शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक युवा वैज्ञानिक अवार्ड सत्र आयोजित किया गया, जिसमें 4 प्रस्तुतियाँ दी गयीं। भेड़ तथा बकरी पालकों की विभिन्न प्रकार की मूलभूत समस्याओं पर चर्चा करने को हित धारकों की भी बैठक आयोजित की गई।

सांयकाल में समापन समारोह आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ ए.के. रावत, निदेशक, डिपाटमेन्ट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एवं सम्मानित अतिथि के रूप में डॉ. के.के. प्रोफेसर सहारिया आसाम कृषि विश्वविद्यालय, डॉ. जितेन्द्र कुमार चौहान, सलाहकार, कृषि मत्रालय, भारत सरकार एवं डॉ. ऐ.के. तोमर, निदेशक केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केन्द्र अविकानगर का स्वागत संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने किया।

जिसमें वैज्ञानिकां एवं शोधार्थियों को विभिन्न सत्रों में पुरस्कार प्रदान किया गया। जिसमें प्रथम सत्र के मौखिक प्रस्तुतिकरण में प्रथम पुरस्कार डॉ. आई. प्रिन्स देवदर्शन, द्वितीय पुरस्कार आर.आर. कुमार, डॉ. ए.के.दास एवं तृतीय पुरस्कार डॉ. एन शानमुगम को दिया गया। द्वितीय सत्र में आर.अरोड़ा, डी. उपाध्याय, ए.के. पॉल ने प्राप्त किया। तृतीय सत्र में श्रीमती जूही पाठक, डॉ. रविरंजन, डॉ. एस.पी. सिंह को दिया गया। युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रथम पुरस्कार डॉ. गौरी जयरथ, द्वितीय पुरस्कार डॉ.प्रीति वत्स, तृतीय पुरस्कार डॉ. एम.एस.डिगे ने प्राप्त किया।

जिसमें भेड़ तथा बकरी पालने से जुड़े विभिन्न हितधारकों तथा आम लोगों के फायदे को जानकारी प्रदान करने के लिए सभी वैज्ञानिक सत्रों की सामग्री वितरित की गई। भेड़ और बकरी पालन के बारे में वैज्ञानिक प्रशिक्षण समेत पशु रोगों की चिकित्सा जानकारी देने से कई रोगों में बहुमूल्य पशुओं को होने वाली क्षति को कमी आएगी। भेड़ और बकरी पालने शुरू करने के लिए वित्तीय सुविधा के लिए आसान ओर उचित नीतियाँ बनाना सही कदम होगा। अभी तक भारत में भेड़ तथा बकरी के उत्पादों के व्यावसायिक स्तर पर मूल्यवर्द्धन अभी प्रारम्मिक और सीमित अवस्था में है।

इस क्षेत्र में युवाओं को आकर्षित/प्रेरित किये जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अभिवृद्धि के साथ-साथ रोजगार में बढ़ेगा। इस संगोष्ठी में सम्मानीय अतिथियों, ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों, छात्रों, शोधार्थियों, प्रगतिशील कृषकों तथा अन्य हित धारकों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस संगोष्ठी के आयोजन को प्रसंस्करण मंत्रालय, भारत सरकार, विज्ञान तथा तकनीक विभाग और अन्य प्रयोजकों से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

संगोष्ठी में कई निर्णय महत्वपूर्ण निर्ण लिये गये। जिसमें पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम गर्भधान मुख्य रूप में भेड़ एवं बकरी पर करने विस्तृत करने को कहा। मांस के निर्यात के लिए उसकी सफाई, सूक्ष्म रोगों की पहचान, बकरी के दूध का प्रंसंस्करण घरेलू बाजार में किस प्रकार से किया जाए।

पशुओं के लिए वैक्सीन, चारा, एवं आनुवंशिक रूप बेहतर प्रजनक बकरे होने से पशुओं में होने वाली कई बीमारियों से पशुओं को बचाया जा सकता है।

परजीवी से भेड़ बकरी में होने वाली बीमारियों से होने वाली आर्थिक हानि से रोकथाम करने के और प्रयास करने चाहिए। ब्ल्यू टंग वैक्सीन, पी.पी.आर. वैक्सीन, हर प्रान्त के वातावरण के अनुसार बनायी जाए। दवा युक्त पोषण भेड़ बकरी में देने के लिए पर प्रकाश डाला। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वी. राजकुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने दिया।